प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस जयवंती हॉक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल में अखिल भारतीय शिक्षा समागम-2026 के अंतर्गत 5 से 10 अक्टूबर तक ‘ शिक्षा से विकसित भारत ’ थीम पर विभिन्न शैक्षणिक, बौद्धिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉ. मीनाक्षी चौबे के मार्गदर्शन में आयोजित इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार, तार्किक चिंतन, तकनीकी जागरूकता, रचनात्मकता तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति रुचि विकसित करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रभारी प्राचार्य डॉ. बी.डी. नागले की अध्यक्षता तथा राजनीति शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र कुमार एवं इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. पल्लवी दुबे के विशिष्ट आतिथ्य में माँ सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। भावना सूर्यवंशी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। भूमिका वक्तव्य में प्रो. राकेश कुमार पवार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप आयोजित ये गतिविधियाँ विद्यार्थियों को शिक्षा के बदलते स्वरूप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग तथा विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में शिक्षा की भूमिका समझने का अवसर प्रदान करती हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. बी.डी. नागले ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण एवं सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बताते हुए विद्यार्थियों से ज्ञान, कौशल, नवाचार और नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया।

वाद-विवाद प्रतियोगिता में एआई आधारित शिक्षा पर मंथन

इस सदन की राय में शिक्षा में एआई का प्रयोग विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में सहायक है विषय पर आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने डिजिटल शिक्षण, शिक्षा की गुणवत्ता, तकनीकी निर्भरता, डिजिटल असमानता तथा शिक्षक-विद्यार्थी संवाद जैसे पहलुओं पर विचार प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता का संयोजन ऋषिकांत पंक्ति ने किया तथा डॉ. शिवदयाल साहू एवं प्रो. कीर्ति वराठे ने मार्गदर्शन दिया। पक्ष में मयंक साहू प्रथम, आदित्य राठौर द्वितीय एवं लिपिक देशमुख तृतीय रहे, जबकि विपक्ष में योगी देशमुख प्रथम, भावना सूर्यवंशी द्वितीय एवं भूपेंद्र यादव तृतीय स्थान पर रहे।

पैनल परिचर्चा में शिक्षा के भविष्य पर चर्चा

भारत में शिक्षा का भविष्य विषय पर आयोजित पैनल परिचर्चा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, कौशल आधारित शिक्षा, रोजगारपरक पाठ्यक्रम, डिजिटल शिक्षण, अनुसंधान, नवाचार एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पर विचार-विमर्श हुआ। परिचर्चा का संयोजन प्रो. राकेश कुमार पवार ने किया। डॉ. राहुल सिंह ठाकुर, प्रो. योगेश्वरी पवार एवं डॉ. अज़ाब खातरकर ने मार्गदर्शन प्रदान किया। योगी देशमुख के नेतृत्व वाली टीम- ए ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।

डिजिटल पोस्टर प्रतियोगिता में भविष्य की शिक्षा की झलक

“ 2047 में शिक्षा की परिकल्पना ” विषय पर आयोजित डिजिटल पोस्टर प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने स्मार्ट कक्षाओं, एआई आधारित शिक्षण, समावेशी शिक्षा, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता का संयोजन डॉ. चंद्रशेखर मेश्राम ने किया तथा डॉ. दिव्या डांगे एवं डॉ. गोपाल पाटील ने मार्गदर्शन दिया। इसमें भूपेंद्र यादव प्रथम, मयंक साहू द्वितीय एवं विष्णु उईके तृतीय स्थान पर रहे।

गायन एवं लोकनृत्य प्रतियोगिताओं में सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन

गायन प्रतियोगिता में श्रुति माहोरे ने प्रथम, भूपेंद्र यादव ने द्वितीय तथा विक्रम पहाड़े ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। भारतीय लोक परंपराओं पर आधारित नृत्य प्रतियोगिता में तनिष्क चौकीकर प्रथम, श्रुति माहोरे द्वितीय तथा विक्रम पहाड़े तृतीय रहे। इन प्रतियोगिताओं ने विद्यार्थियों की कलात्मक अभिव्यक्ति, आत्मविश्वास तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति अभिरुचि को प्रोत्साहित किया। विभिन्न प्रतियोगिताओं में निर्णायक के रूप में डॉ. धर्मेंद्र कुमार, डॉ. पल्लवी दुबे एवं डॉ. देवी सिंह सिसोदिया ने प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया। उन्होंने विद्यार्थियों की विषयगत समझ, तर्कशक्ति, मौलिकता, रचनात्मकता एवं प्रस्तुति कौशल की सराहना की।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. चंद्रशेखर मेश्राम ने आभार व्यक्त करते हुए आयोजन में सहयोग देने वाले अतिथियों, प्राध्यापकों, आयोजन समितियों, निर्णायकों एवं प्रतिभागियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।