प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के माध्यम से श्रीमती वंदना श्रीवास ने अपने सिलाई के हुनर को व्यवसाय का रूप दिया है। आज वे स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही हैं।
6-7 वर्षों से कर रही हैं सिलाई का कार्य
लाभार्थी वंदना कहती है कि वे करीबन 6-7 वर्षों से सिलाई का कार्य कर रही हैं। प्रारंभ में वे ब्लाउज एवं बच्चों के कपड़े सिलने का कार्य करती थी। वर्ष 2024 में वे पीएम विश्वकर्मा योजना से जुड़ीं और 6 दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वर्तमान में उन्होंने एडवांस प्रशिक्षण भी लिया है। प्रशिक्षणों के जरिए उन्हें अपने हुनर को निखारने और व्यवसाय को आगे बढ़ाने की नई दिशा मिली।
योजना अंतर्गत उन्हें टूलकिट भी प्रदान की गई है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद लाभार्थी वंदना ने 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता से अपने कार्य का विस्तार किया। वे कहती है कि अब वे डिजाईनर ब्लाउज बनाने के साथ ही, पेटिकोट, रजाई-तकिया कवर सहित अन्य सिलाई के ऑर्डर भी लेती है।
व्यवसाय विस्तार से उनकी आय बढ़ी है और अब वे अपने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई में भी सहयोग कर पा रही हैं। लाभार्थी वंदना श्रीवास ने बताया कि वे अन्य महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध करा रही है, इस व्यवसाय के माध्यम से करीबन 4 महिलाओं को रोजगार मिल रहा है।
हितग्राही वंदना ने अपनी लगन एवं प्रशिक्षण के जरिए व्यवसाय को आगे बढ़ाया हैं, वे कहती है कि, आगे भी नई-नई तकनीकों को जानकार, सीखकर अपने व्यवसाय को व्यवस्थित कार्य योजना के साथ और आगे बढ़ाना चाहती है। इसके अतिरिक्त उन्हें लाड़ली बहना योजना का लाभ भी प्राप्त हो रहा है।
विदित है कि केन्द्र सरकार के माध्यम से चलाई जा रही प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों एवं शिल्पकारों को आर्थिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है। योजना के तहत बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, मूर्तिकार, राजमिस्त्री, नाई, दर्जी, धोबी सहित विभिन्न पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को सहायता प्रदान की जाती है।
लाभार्थियों को कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए टूलकिट प्रोत्साहन तथा आसान शर्तों पर ऋण की सुविधा भी दी जाती है।


