टीकमगढ़ जिले के विकासखण्ड पलेरा के ग्राम रामनगर बुजुर्ग की श्रीमती सगुन अहिरवार का परिवार पहले खेती और मजदूरी पर निर्भर था। खेती की जमीन कम होने के कारण परिवार की आय सीमित थी और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में कठिनाई होती थी। आजीविका मिशन के अंतर्गत गांव में स्व-सहायता समूहों के गठन के दौरान श्रीमती सगुन अहिरवार राधा रानी स्व-सहायता समूह से जुड़ीं।
उन्होंने शुरुआत में समूह से 1,000 रुपये का ऋण लिया और समय पर चुकाया। इसके बाद 20,000 रुपये का ऋण लेकर सिलाई कार्य की दुकान प्रारंभ की। धीरे-धीरे उनका सिलाई व्यवसाय आगे बढ़ने लगा। समूह की बैठकों और क्षमतावर्धन गतिविधियों में सहभागिता से उनके कौशल में निखार आया। आज वे मिशन से जुड़ी गतिविधियों के साथ अपनी सिलाई की दुकान भी संचालित कर रही हैं।
उनकी व्यक्तिगत मासिक आय लगभग 4,000 रुपये से बढ़कर 8,000 रुपये तथा पारिवारिक मासिक आय 6,000 रुपये से बढ़कर 12,000 रुपये हो गई है।


