बड़वानी के पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय में हिंदी साहित्य का इतिहास किताब के पन्नों से निकलकर मंच पर दिखाई दिया। हिंदी माह के अंतर्गत कक्षा 11 के विद्यार्थियों ने अलग-अलग साहित्यिक कालखंडों की विशेषताओं को अभिनय और संवाद के जरिए समझाया।
प्रभारी प्राचार्य कुंदन राठौर के मार्गदर्शन में हुए कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य की विकास-यात्रा और उसकी प्रमुख प्रवृत्तियों से परिचित कराना था। कार्यक्रम की संयोजिका आभा जैन रहीं।
वीरगाथा से भक्ति परंपरा तक
योमित गंगवाल ने आदिकाल का प्रतिनिधित्व करते हुए उसकी समय-सीमा और वीरगाथात्मक साहित्य की प्रमुख प्रवृत्तियां बताईं। चंदन जारेवाल ने भक्तिकाल की निर्गुण और सगुण धाराओं के साथ संत, सूफी, रामभक्ति और कृष्णभक्ति परंपराओं का परिचय दिया।
भक्तिकाल की प्रस्तुति में लोकभाषा, भक्ति और मानवीय मूल्यों को साहित्य में मिले स्थान को भी रेखांकित किया गया। इससे विद्यार्थियों के सामने साहित्य और तत्कालीन सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन का संबंध रखा गया।
रीतिकाल और आधुनिक साहित्य की झलक
प्रिया भावर ने रीतिकाल की भूमिका निभाते हुए श्रृंगार-प्रधान काव्य, अलंकार, नायिका-भेद और काव्यशास्त्रीय परंपरा की जानकारी दी। प्रिया बघेल ने आधुनिक काल में कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध और पत्रकारिता के विस्तार को प्रस्तुत किया।
छात्रा गायत्री मुवेल ने सूत्रधार के रूप में अलग-अलग कालखंडों को क्रमबद्ध ढंग से जोड़ा। प्रभारी प्राचार्य कुंदन राठौर ने विद्यार्थियों के प्रयास की सराहना की और इसे हिंदी की विकास यात्रा को रेखांकित करने वाला बताया।


