दीप और चाबी अलग लॉट हैं। शनिवार, अमलाहा, खाद्य दलहन अनुसंधान केन्द्र। मुख्यमंत्री डॉ. यादव: बीज से बाजार तक। लक्ष्य 2030-31 तक दलहन 350 लाख टन—यह राष्ट्रीय मिशन वाक्य है। मध्यप्रदेश दलहन में देश में पहले स्थान पर बताया गया।
नवनिर्मित प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण केन्द्र, अत्याधुनिक प्लांट टिशू कल्चर प्रयोगशाला का लोकार्पण हुआ। केन्द्रीय मंत्री श्री चौहान: टिशू कल्चर से मसूर सहित दलहन की नई किस्में तैयार हो रही हैं। इकार्डा के माध्यम से उन्नत बीज तैयार किए जाएंगे। बीज ग्राम और बीज हब बनाए जाएंगे। प्रगतिशील किसान को एक हेक्टेयर दलहन पर 10 हजार रुपये प्रोत्साहन दिया जायेगा।
आँकड़े किसके हैं
संयुक्त सचिव श्री संजीव कुमार अग्रवाल: राष्ट्रीय मिशन 11,440 करोड़। केन्द्रीय मंत्री: प्रदेश को 354 करोड़; 1000 दाल मिलों में 55 मध्यप्रदेश में। तुअर 8000, उड़द 7800, चना 5875, मसूर 7000 रुपये प्रति क्विंटल खरीद की पंक्ति—केन्द्र की घोषणा। इकार्डा महानिदेशक श्री अली अबुर साबा: शोध केंद्रों में 41 किस्में। आईसीएआर महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट: देश औसत 926 किलोग्राम/हेक्टेयर, मध्यप्रदेश 1200; देश अगर सीखे तो 8 मिलियन टन बढ़ सकता है—यह प्रक्षेपण है, बोई फसल नहीं।
दलहन मिशन पोर्टल शुभारंभ, आईसीएआर बुलेटिन/पुस्तक विमोचन, प्रदर्शनी, पौध-रोपण। भावांतर से सोयाबीन पर 1500 करोड़ से अधिक की पंक्ति मुख्यमंत्री ने कही; वह बीज प्रमाणीकरण तालिका नहीं। चित्र 7 फरवरी सम्मेलन का है, टैग स्कैन का नहीं।
मुख्य बातें
- लैब-भवन उस दिन लोकार्पित हुए।
- बीज ग्राम और हब भविष्य की पंक्ति हैं।
- 41 किस्में इकार्डा शोध केंद्रों की हैं, सीहोर रिलीज सूची नहीं।
स्रोत और संदर्भ
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 17 सितंबर 2026।



